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रात 9:06 से 10:16 बजे तक भद्रा पुंछ में होगा होलिका दहन, दिनभर महिलाओं ने की पूजा

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देहरादून : Holika Dahan होलिका दहन आज रात 9:06 से 10:16 बजे के बीच भद्रा पुंछ में किया जाएगा। इससे पूर्व दिनभर लोग ने विभिन्‍न चौक चौराहों पर होलिका की पूजा की। वहीं कल यानी शुक्रवार को रंगों की होली मनाई जाएगी।

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा के दिन हालिका दहन किया जाता है। आचार्य डा. सुशांत राज के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि शुक्रवार को दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। ऐसे में होलिका दहन गुरुवार का होगा। गुरुवार रात एक बजकर 13 मिनट तक भ्रदाकाल का साया रहेगा। पुंछकाल में भद्रा का प्रभाव कम रहता है, जिसकी वजह से भद्रा की छाया कमजोर हो जाती है और इसका दोष भी खत्म हो जाता है। इसलिए पुंछकाल में होलिका दहन शुभ माना जाता है।

दिनभर विभिन्‍न चौराहों पर होलिका पूजा

शहर के विभिन्‍न चौक चौराहों पर होलिका सजाई गई। सुबह से ही महिलाएं टोलियां बनाकर शहर के विभिन्न चौराहों पर बनी होलिका पर पहुंचनी शुरू हो गई थी। इस दौरान महिलाओं ने होलिका पर धागा बांधा और माथा टेक कर बच्चों और स्‍वजन की लंबी आयु की मन्नतें मांगी।

यह है मान्‍यता

मान्यता है कि हिरण्यकश्यप ने अपने बेटे पह्लाद को मारने के लिए बहन होलिका को आदेश दिया था कि वह उसको गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, लेकिन ईश्वर की भक्ति में लीन प्रह्लाद बच गए। ईश्वर भक्त प्रह़्लाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है।

देर शाम तक दुकानों में उमड़ी रही भीड़

होली को लेकर राजधानी के बाजारों में देर शाम तक खरीदारों की भीड़ रही। सुबह से ही हनुमान चौक, पलटन बाजार, करनपुर बाजार, चकराता रोड, धर्मपुर, पटेलनगर, प्रेमनगर आदि क्षेत्रों की दुकानों में कपड़े, खाद्य सामग्री, मिष्ठान, रंग, पानी के गुब्बारे, पिचकारी आदि की खरीदारी हुई। इसके अलावा गुझिया, पापड़ चिप्स, नमकीन, रेडीमेड दहीबड़ा पाउडर, पनीर, दही की भी खूब खरीदारी हुई।

स्वदेशी रंगों की धूम

त्योहारों पर बाजार में दबदबा बनाने वाला चाइनीज उत्पाद इस बार बाजार से लगभग गायब रहे। ग्राहकों की मांग और क्रेज को देखते हुए बाजार में स्वदेशी गुलाल, हर्बल रंगों की अधिकता देखने को मिली। बच्चों से लेकर बड़ों तक कार्टून मास्क व पिचकारी, वाटर पंच बैलून, स्प्रे कलर की खूब खरीदारी हुई।

दर्शनी गेट के पास नहर वाली गली में होलसेल व्यापारी मनोज गुप्ता ने बताया कि दो साल के बाद इस बार लोग में होली को लेकर खासा क्रेज दिखा। कुछ पंच बैलून को छोड़ दें तो इस बार व्यापारियों ने चाइनीज का बहिष्कार किया था, जिसके चलते होली पर चाइनीज सामान नहीं हैं। स्वदेशी उत्पादों से बाजार सजे हैं।

सहारनपुर चौक स्थित व्यापारी एस. नागलिया ने बताया कि इस बार बच्चों के लिए छोटा भीम, स्पाइडरमैन, कालिया, चिंगम सर के मुखौटे और पिचकारियां 30 रुपये से लेकर 300 रुपये तक उपलब्ध रही। जिनकी खूब खरीदारी हुई। पहली बार बाजार में होली की रंगीन टी-शर्ट, पानी कलर, पगड़ी, टैंक पिचकारी, कागज व कपड़े की टोपी की मांग अधिक दिखी।

पलाश के फूल से तैयार गुलाल विशेष

बाजार में होली पर इस बार पलाश के फूलों से तैयार गुलाल ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है। सहारनपुर चौक के दुकानदार एस नागलिया ने बताया कि ग्राहक अब जागरूक हो चुके हैं, हानिकारक रंगों का बहिष्कार कर प्राकृतिक रंगों को पसंद कर रहे है। इस बार पलाश के फूल से तैयार गुलाल को लोग खूब पसंद कर रहे हैं।

स्टोर पर भी हर्बल रंगों की धूम

देहरादून के विभिन्न स्टोर पर महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा फलों के रस और पत्तियों से तैयार किए हर्बल रंग ग्राहकों को खूब भा रहे हैं। बल्लपुर चौक स्थित पहाड़ी स्टोर के संचालक रमन शैली ने बताया कि विश्वनाथ घाटी मधुमक्खी पालन सहकारिता संस्था से जुड़ी महिलाओं ने टिहरी के विभिन्न क्षेत्रों में मक्का, चुकंदर, लेमनग्रास से हर्बल रंग तैयार कर देहरादून में भेजा। ये हर्बल रंग हरा, पीला और नारंगी रंग में उपलब्ध है।

कार्यशाला के माध्यम से किया जा रहा जागरूक

स्पेक्स संस्था के सचिव डा. बृजमोहन शर्मा ने बताया कि रसायन वाले मिलावटी रंग त्वचा, बाल, आंख और पांचन तंत्र पर सीधा प्रभाव डालते हैं। इसलिए अब अधिकांश लोग प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर रहे हैं। बताया कि संस्था द्वारा होली पर तैयार किए जा रहे रंग के लिए विजय कालोनी, भोगपुर और हरिपुर कला में महिलाओं के ग्रुप कार्य कर रहे हैं। स्पेक्स विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से लोग को बाजार में रंग में हो रही मिलावट और प्राकृतिक रंग बनाने की प्रक्रिया के बारे में बनाते हैं।

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